Wednesday, September 17, 2008
पाकिस्तान को घेरने की कोशिश?
सुखोई विमान घातक परमाणविकआयुध ले जाने में सक्षम हैं। भारत सरकार की तरफ़ से अभी ये नहीं बताया गया है कि अचानक इन विमानों कि तैनाती कि क्या जरूरत पड़ गई है।
दिल्ली में राजनयिक सूत्रों ने आशंका जताई है कि भारत को अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव बनने के लिए उकसाया है। याद रहे पाकिस्तान कि अफगानिस्तान से लगी सीमा पर अमेरिकी सैनिकों का आतंकवादी विरोधी अभियान जारी है।
पाकिस्तान के लाख विरोध के बावजूद अमेरिकी सैनिकों ने पिछले पखवाड़े में कम से कम तीन बार पाकिस्तानी सीमा का अतिक्रमण कर विद्रोहियों पर हमले किए हैं। इस क्षेत्र के इतिहास में ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि एक संप्रभुता प्राप्त देश कि मर्जी के खिलाफ किसी तीसरी शक्ति ने उसकी सीमा में घुस कर अपने विरोधियों पर हल्ला बोला हो। इससे जाहिर होता है कि अमेरिका आतंकवादियों के सफाए के लिए किस कदर प्रतिबद्ध है।
अमेरिका ने पिछले दिनों खुल कर कहा है कि दुनिया में आतंकवादियों का सबसे बड़ा गढ़ पाकिस्तान ही है.
Tuesday, September 16, 2008
आतंक के खिलाफ कड़े कानून नहीं लाएगी केन्द्र सरकार: पाटिल
केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि आतंकियों के मसले पर अलग से किसी कठोर कानून कि कोई जरूरत नहीं है। सनद रहे कि गुजरात सहित भाजपा शासित कई राज्य सरकारों ने महाराष्ट्र कि तर्ज पर सख्त कानून पारित करने कि मांग कर राखी है। केन्द्र ने उन्हें खारिज कर दिया है जबकि महाराष्ट्र में ऐसा कानून बाकायदा लागू है। इतना ही नहीं सरकार ने आतंकवाद निरोधी कानून (पोटा) भी खत्म कर दिया है।
श्री पाटिल ने स्वीकार किया कि केन्द्र सरकार को दिल्ली में हमले कि आशंका के बारे में पहले से चेतावनी तो मिल गई थी, लेकिन सटीक तारीख और स्थान के बारे में नहीं पता था।
पाटिल के इन बयानों कि काफी तीखी आलोचना हुई है। विपक्षियों ने पाटिल का उपहास करते हुए पूछा कि क्या उनकी सरकार आतंकियों से तारीख, समय और ठिकाना बता कर हमले करने कि आस करती है।
विस्फोट वाले दिन कुछ ही मिनटों के अन्तराल से कई बार पोशाकें बदले जाने को लेकर हो रही आलोचना के जवाब में पाटिल ने कहा कि आप हमारी नीतियों कि आलोचना करें, मेरे पोशाकों कि नहीं।
विपक्ष कि उनकी इस्तीफे कि मांग पर बोलते हुए पाटिल ने कहा कि मुझे सोनिया गाँधी का आशीर्वाद प्राप्त है। मुझे कोई नहीं हटा सकता। विपक्ष कि मांग कि मुझे कोई परवा नही है।
दिल्ली विस्फोटों का मास्टर माईंड अभी भी पकड़ से बाहर
दिल्ली विस्फोटों के मास्टर माईंड अब्दुस subhan कुरैशी का अभी तक अता-पता नहीं मिला है। यह आदमी इंडियन मुजाहिदीन और ऐसे ही कई अन्य संगठनों के पीछे की प्रमुख शक्ति बताया जाता है। राजनीति में इसके कई पैरोकार हैं जो मुस्लिम वोटों के खातिर इसकी गिरफ्तारी के खिलाफ हैं।
याद रहे उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह ने अपनी सरकार बनते ही सिमी पर से प्रतिबन्ध उठा लिया था और वे आज भी सिमी की वकालत करते हैं। यही मुलायम सोनिया के साथ सौदा करके मनमोहन सिंह की सरकार को बचने के लिए आगे आए थे। गुजरात में हुए विस्फोटों के सन्दर्भ में गिरफ्तार संदिध आतंकियों के परिवारों के साथ सहानुभूति जताने के लिए कांग्रेस के कई दिग्गज भी उनके गाँव जाकर मिले थे। सवाल है कि क्या सरकार ऐसे में सचमुच ही सत्तार जैसे आतंकियों कि गिरफ्तारी कर सकेगी?
वैसे दिखावे के लिए सरकार इंटरपोल को भी सत्तार कि गिरफ्तारी के लिए सूचना जारी कर चुकी है। इंटरपोल देश के बाहर निकल गए अपराधियों को पकड़ने में मदद करती है। सत्तार के बारे में अनुमान है कि वह भारत कि सीमा में ही मौजूद है। तो क्या इंटरपोल को बीच में घसीटना राजनीति की नौटंकी है?
Sunday, September 14, 2008
अबकी बारी मुंबई को उड़ाने की
दिल्ली में विस्फोटों की जिम्मेदारी लेनेवाले संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने अबके मुंबई में अधिक घातक हमले और विस्फोट करने की धमकी दी है। एक e-मेल में संगठन ने मुंबई के आतंकवाद विरोधी टुकड़ी पर मुसलमानों के प्रति भेदभाव की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगते हुए धमकाया है कि इसका बदला खूनी वारदातों को अंजाम देकर लिया जाएगा।
इंडियन मुजाहिदीन ने यह भी कहा है कि जयपुर में विस्फोटों को अंजाम देनेवाले उसके सारे सदस्य पूरी तरह से सुरक्षित हैं और अब अधिक खूनी वारदातों को अंजाम देने कि तयारी में लगे हुए हैं। e-मेल मुंबई से ही भेजा गया है और इसमें राजस्थान के वरिस्थ पुलिस अधिकारी श्री जैन को निशाने पर लेने कि बात भी कही गई है। श्री जैन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जयपुर धमाकों से जुड़े अनेकों संदिग्ध आतंकियों को पकड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इस ख़बर के लिखे जाने तक केन्द्र सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने आतंकियों कि इस खुली चुनौती के बारे में कुछ भी नहीं कहा था। माना जा रहा है कि यह धमकी आतंकियों के बढ़ते मनोबल और सरकार कि टूटती हिम्मत का सूचक है।
Saturday, September 13, 2008
दिल्ली में विस्फोट: कमजोर सरकार पर एक और चोट
आख़िर क्या वजह है कि भारत में ही ऐसे धमाके होते रहते हैं? दुनिया में मुसलमानों को सबसे ज्यादा चिढ अमेरिका से है। लेकिन गौर करें कि वहां हिंदुस्तान कि तरह आए दिन आतंकी वारदातें नहीं होतीं। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को गिराने कि घटना के बाद वहां कोई बड़ी वारदात करने कि हिम्मत आतंकियों की नहीं हुई। आख़िर क्यों?
अमेरिका एक सख्त देश है और वह आतंकियों से किसी भी मुद्दे पर सोदबजी नही करता। इसके उलट भारत का इतिहास कायराना रहा है।
विश्वनाथ प्रताप से लेकर भाजपाई सरकारों ने लगातार आतंकियों से समझौते किए हैं। सोनिया के इशारे पर नाचनेवाली मौजूदा सरकार से किसी भी किस्म के सार्थक कदम उठाने की उम्मीद करना बेमानी है।
आख़िर हमारी जनता कब तक ऐसी सरकारें चुनती रहेगी और ख़ुद का नाश करवाती रहेगी?
इस मुद्दे पर मैं आपके विचार जानना चाहूँगा।
Tuesday, September 2, 2008
वाई-फाई का आतंक जयपुर शहर में भी
भेजनेवाले तो अभी भी पुलिस की पकड़ से बहार हैं लेकिन शिक्षा संस्थान के प्रमुखों को आज भी पुलिसिया जाँच-पड़ताल का मुकाबला करना पड़ रहा है।
हमारी सलाह है की आप भी अपने बच्चों को इन खतरों के बारे में आगाह करके रखें। उन्हें बतावें की वे कभी भी संदिग्ध चरित्र के लोगों से वास्ता न रखें और कोई भी बात नजर में आते ही विद्यालय प्रशाशन या आपको जरूर बतावें.