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Monday, September 8, 2008

बिहार की बाढ़ से तुरत राहत नहीं

बिहार सरकार ने चेतावनी दी है की बाढ़ से विस्थापित करीब ढाई लाख लोगों को अगले छः महीनों से भी अधिक समय तक शिविरों में रहना पड़ सकता है। शिविरों की हालत बेहद ख़राब है। सफाई की कोई ठीक व्यवस्था नहीं होने के कारन महामारियों के फैलने का खतरा पूरी तरह से विद्यमान है।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि बाढ़ प्रबंधन की समुचित नीति और कार्य योजना के अभाव में साल दर साल ऐसी आपदावों के टूट पड़ने का खतरा ज्यों का त्यों मौजूद है.

Tuesday, September 2, 2008

अब बिहार में महामारी का खतरा

बाढ़ से घिरे बिहार वासियों की मुश्किलें बढ़तीं ही जा रही हैं। पहले पानी, फ़िर अन्न-पानी, फ़िर गुन्डे-लुटेरे और अब महामारी फैलने का खतरा।
बाढ़ में मरे अनगिनत जीव-जन्तुओं के अवशेष और चारों तरफ़ फैली गन्दगी धीरे-धीरे मुसीबतें बनती जा रही हैं। प्रशाशन अपनी तरफ़ से पूरी कोशिशें कर रहा है। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर सफाई और व्यवस्था बनाये रखना कोई आसान बात नहीं है.

बिहार में बचाव कार्य में 3000 से अधिक सैनिक लगाये

बिहार में बाढ़ की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। अन्न-पानी के लिए लोग आपस में लगातार खूनी संघर्ष कर रहे हैं। कई इलाकों से लूट और बलात्कार की खबरें भी आ रही हैं। पानी का बढ़ना तो रुक गया है लेकिन बरसात बनी रहने की दशा में नेपाल की ओर से और भी पानी छोड़ा जा सकता है।
ऐसे में सरकार ने ३००० से अधिक सैनिकों को राहत कार्य में लगाया है।

आशंका की जा रही है कि राहत कार्यों के लिए घोषित एक हजार करोड़ रुपये से अधिक कि राशि नौकर-कर्मचारी और सफेदपोश नेता ही डकार जायेंगे। बिहार सहित देश के कई हिस्सों में ऐसी आपदा सामग्री भी डकार जाने कि घटनाएँ होती रही है।

पिछले लालू सरकार के जमाने में हुए राहत कार्य घोटालों में कईयों को सजाये मिल चुकी हैं जबकि कई मामले अदालतों में अभी भी लंबित हैं।