Sunday, September 14, 2008

जयपुर की श्वांस धाराएँ बन गए हैं अजमेर और सीकर रोड

जयपुर में महिंद्रा के विशेष आर्थिक ज़ोन जैसी परियोजनाओं के बदौलत अजमेर रोड और मूलतः आवासीय परियोजनाओं के बदौलत सीकर रोड पर इतनी तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं कि इन्हें हम आज जयपुर कि मुख्य धमनियां कह सकते हैं।
हाल के दिनों में शहर में आवासीय परियोजनाओं में काफी मंदी कि बातें कि जा रही हैं। एकमात्र आर्थिक रूप से समर्थ कोलानेजर्स को छोड़ बाकी छुटभैयों कि हालत ख़राब है। ऐसे में बड़े बिल्डरों कि जारी परियोजनाएं ही शहर की आन रखे हुए हैं।
प्रापर्टी के धंधे से जुड़े लोगों के मुताबिक मांग में मंदी तो है पर कीमतों में कोई विशेष गिरावट न तो है न होने की कोई बड़ी आशंका ही है। मांग में कमी आने से सिर्फ़ इतना हुआ है कि बेतहाशा बढ़ती कीमतों को थोड़ा लगाम लग गया है। यह लगाम तो आख़िर कभी न कभी लगना ही था। अर्थशास्त्र के नियम भी यही कहतें हैं कि किसी भी चीज या सेवा की कीमतें अनवरत नहीं बढ़ सकतीं। कीमतों को विराम लेना ही पड़ता है। इस सिद्धांत के मुताबिक अगले कुछेक महीनों में प्रोपर्टी की कीमतें एक बार फ़िर बढ़नी चाहिए.

भयावह त्रासदी फ़िर याद आई, सरकारों पर भरोसा नहीं

दिल्ली में हुए धमाकों ने जयपुर वासियों के मन में चार महीने पहले की भयावह त्रासदी की यादें ताजा कर दी हैं। लोग एक बार फ़िर चिंतित दीख रहें हैं। रविवार को शहर के बड़ी चौपड़ पर हमने कुल ११७ व्यक्तियों से, जिनमें २५ से ४० वर्ष के लोगों की संख्या अधिक रही, पूछा की क्या वे अपने आपको सुरक्षित महसूस करते हैं तो तीन चौथाई से अधिक लोगों का जबाब न में था।
यह पूछने पर कि क्या वे राज्य या केन्द्र सरकार पर उनकी पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था का भरोसा करते हैं जबाब एक बार फ़िर न में था। अपवादों को छोड़ किसी को सरकारों पर भरोसा नहीं है।

दिल्ली विस्फोट में मरनेवालों की संख्या ३० से अधिक संभव

दिल्ली विस्फोट में मरने वालों की संख्या १८ के पर चली गई है। हमारे सूत्रोंके मुताबिक यह संख्या ३० से अधिक हो सकती है। याद रहे ५० से अधिक लोग गंभीर अवस्था में दिल्ली के कई अस्पतालों में भरती हैं। सबसे ज्यादा घायल व्यक्ति राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भरती

सरकार ने विस्फोट की जिम्मेदारी लेनेवाले संगठनों के बारे में कुछ भी कहने से इंकार करते हुए इस दिशा में जाँच कराने की बात कही है। हम इस सरकार से इससे अधिक उम्मीद भी क्या करें?

और भी कम्पनियाँ कलकत्ता से निकलने की तैयारी में

कम्युनिस्टों से देश के बड़े औद्योगिक घरानों की हनीमून पूरी हो गई सी लगती है। टाटा के बाद इन्फोसिस के बारे में सुनने को आया कि दुनिया में प्रसिद्ध हो चुकी यह कंपनी कोलकाता के कारोबारी माहौल से सुखी नहीं है।
इन्फोसिस ने हालाँकि अभी तुरत निकलने का विचार बनाने की बात से मना कर दिया है। लेकिन ऐसी आशंका को खारिज भी नहीं किया है। इसके मुकाबले सत्यम ने साफ तौरसे निकलने का विचार जताया है।
सत्यम सोफ्टवेयर बनानेवाली देश की चौथी सबसे बड़ी कंपनी है।

आज क्या होगा?

गेहूं और अन्य खाद्यान्नों में तेजी।
शेयरों में नरमी।
लोहा, सीमेंट स्थिर।
गुड, खांड, चीनी, जैसी चीजों में तेजी का रुख।
सोना, चांदी नरम।
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यह हमारे भविष्यवक्ता का अनुमान है। इस पर कार्रवाही करने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करें।

नौकर नाराज हैं और मालिक बेकदर

राजस्थान सरकार के तहत काम करनेवाले नौकर नाराज हैं कि नहीं इस बारे में काफी कयास लगाये जा रहे हैं। यह भी कहा जा रहा की उनकी नाराजगी मौजूदा सरकार को भारी पड़ सकती है। लेकिन इन नौकरों का बोझ उठानेवाली और इनकी धौंस सहनेवाली जनता का हाल कोई पूछनेवाला नहीं है। केन्द्र ने वेतनमान बढ़ा दिया है तो देर सवेर सारी राज्य सरकारों को भी ऐसा करना ही पड़ेगा। नतीजतन महंगाई बेतहाशा बढ़ेगी। बढ़ रही है। चुनाव सामने है। इसलिए अपनी-अपनी गद्दियाँ सुनिश्चित करने कि होड़ में आर्थिक सुव्यवस्था रूपी द्रोपदी कि चीर खींच के नंगा किया जा रहा है। और जिम्मेदार कहे जानेवाले लोग भीष्म पितामह कि तरह चुप बैठे हैं।
जब नौकर मालिक बन जाते हैं तो फ़िर यही होता है। नेहरू ने रूस कि तर्ज पर जो सरकारी तंत्र खड़ा किया वह कैंसर कि तरह समाज को खाए जा रहा है। भ्रस्टाचार शर्म-हया कि सीमायें न जाने कब का लाँघ चुका है। समाजवाद के झंडाबरदार और सार्वजनिक क्षेत्र के पैरोकार न जाने कब होश में आयेंगे?
लेकिन दुःख पानेवाली जनता के बारे में सहानुभूति कि जरूरत भी नहीं है। लफंगों को प्रतिनिधि चुननेवाली जनता को सजा तो मिलनी ही चाहिए।
भोगिये श्रीमन, अभी तो शुरुआत है। आगे बहुत कुछ होना बाकी है।

राजस्थान विधान सभा चुनाव का ताजा रुख

राजस्थान में हमारे संवाददाताओं के ताजा आकलन के मुताबिक वसुंधरा राजे ही दुबारा सरकार बना रही हैं।
भाजपा का स्कोर है - ६
कांग्रेस - ३
बसपा व अन्य - १
कुल - १०
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ताजा रुझानों के लिए इस पन्ने को देखते रहिये।