टाटा मोटर्स ने आज औपचारिक रूप से सिंगुर कारखाने की स्थापना का कम रोकने का एलान कर दिया है। हालाँकि कंपनी ने अभी कोई वैकल्पिक योजना नहीं बताई है, फ़िर भी अनुमान लगाया जा रहा है कि अब बहुचर्चित नैनो कर देश में कहीं दूसरी जगह बनाई जायेगी।
टाटा के इस कदम के बाद
Tuesday, September 2, 2008
कार से कुचलनेवाला रईसजादा दोषी साबित
नई दिल्ली की एक अदालत ने अब से करीब नौ साल पहले अपनी BMW कार से फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कुचल कर भागने के एक मामले में रईसजादे संजीव नंदा को दोषी करार दिया है।
कार से कुचलकर ६ लोग मरे गए थे। बाद में इस मामले में कई रोचक मोड़ आए। नंदा के दो वकीलों को कोर्ट ने गवाहों को खरीदने की कोशिशें करने का भी दोषी पाया है। एक बार तो ऐसा लग रहा था मानो पैसे के बूते नंदा बिल्कुल ही बच निकलेगा। सारे गवाह मुकर चुके थे। पुलिस मामले की तहकीकात में आनाकानी कार रही थी और अरियादियों की तरफ़ से कोई बोलनेवाला नही दीख रहा था।
अचानक एक टीवी चैनल के स्टिंग आपरेशन ने सब कुछ बदल डाला। चैनल ने साबित किया कि गवाह खरीदे गए हैं। बस फ़िर क्या था! अदालत सख्त हो गयी, दिल्ली पुलिस को हर बार की तरह एक और फटकर मिली और आखिरकार इंसाफ जीत गया।
नंदा को सजा कल सुनाई जायेगी।
कार से कुचलकर ६ लोग मरे गए थे। बाद में इस मामले में कई रोचक मोड़ आए। नंदा के दो वकीलों को कोर्ट ने गवाहों को खरीदने की कोशिशें करने का भी दोषी पाया है। एक बार तो ऐसा लग रहा था मानो पैसे के बूते नंदा बिल्कुल ही बच निकलेगा। सारे गवाह मुकर चुके थे। पुलिस मामले की तहकीकात में आनाकानी कार रही थी और अरियादियों की तरफ़ से कोई बोलनेवाला नही दीख रहा था।
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नंदा को सजा कल सुनाई जायेगी।
रईसजादे को पाँच साल की जेल की सजा हुई है।
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अरसे बाद शेयरों में तेजी
विश्व बाजार में पेट्रोलियम की कीमतों में नरमी का आज शेयर बाजार में अनुकूल असर देखा गया। महंगाई में कटौती की आस बनते ही शेयर बाजार में खरीद बढ़ गयी और सेंसेक्स के लगभग सारेशेयरों में औसतन चार फीसदी की बढ़त दर्ज की गयी।
आज से शेयर बाजार पर नजर रखेंगें एक विशेषज्ञ। उनके विश्लेषण अकेले खबरें आनलाईन में ही प्रकाशित होंगे।
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खायेगी गोरी पकायेगा साजन
समय के साथ मान्यताएं बदलती रहती हैं। एक ख़बर के मुताबिक दिल्ली में रहनेवाली महिलाओं को रसोई में कुशल मर्द ज्यादा पसंद हैं।
इसलिए आजकल वहां मालदार वर्ग के लोग खाना पकाना सीख रहे हैं। सीखनेवालों का जोर देसी के बजाय चाइनीज, थाई और अन्य एशियन पकवानों पर ज्यादा है।
इसलिए आजकल वहां मालदार वर्ग के लोग खाना पकाना सीख रहे हैं। सीखनेवालों का जोर देसी के बजाय चाइनीज, थाई और अन्य एशियन पकवानों पर ज्यादा है।
श्री गणेश चतुर्थी की बधाइयाँ
खबरें आनलाईन अपने सभी सुभेक्छु पाठकों को श्री गणेश चतुर्थी की शुभकामनायें देते हुए उनसे लगातार समर्थन और स्नेह की कामना करता है।
भगवान आपको सदा सुखी, प्रसन्न और साधन सम्पन्न बनाये रखे.
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कश्मीर में कर्फ्यू में ढील
रमजान के महीने की शुरुआत के साथ ही कश्मीर की घाटी में कर्फ्यू में ढील दी गयी है। जम्मू में आन्दोलन कर रहे लोगों से समझौता होते ही उधर भी शान्ति है।
मजे की बात यह है की जम्मू के लोगों से हुआ समझौता कोई नई बात को आधार बना के नहीं हुआ है। समझौते का मुद्दा तो पहले से ही तय था। बस सरकार ही उसे उलझा रही थी।
श्री अमरनाथ श्रायीं बोर्ड को जारी मौलिक आदेश में साफ़ तौर पर कहा गया था की उन्हें दी जानेवाली जमीन अस्थाई तौर पर इस्तेमाल के लिए है। यह तो उस दस्तावेज में भी कहीं नही था कि बोर्ड को कोई पक्का कब्जा दिया जा रहा है।
घाटी के मुसलमानों को बहकानेवालों ने इसे ग़लत तरीके से पेश किया। झूठी खबरें फैलाई गयीं मानो बोर्ड को कोई पक्का कब्जा दिया जा रहा हो। बोर्ड ने पक्के कब्जे कि कभी इच्छा भी नहीं जताई। मांग सिर्फ़ इतनी थी कि श्री अमरनाथ जी कि यात्रा के दौरान उस जमीन पर अस्थाई शिविर आदि लगाने दिया जाए ताकि यात्रियों को तकलीफों से बचाया जा सके।
अलगाववादियों ने तो सदा ही झूठ और फरेब का सहारा लिया है। मुसलमानों कि तुष्टिकरण कि अपनी परम्परा के कारणदिल्ली में बैठी सरकार घाटी में उठी एक आवाज पर हिल गयी और बोर्ड का करार रद्द कर दिया गया। इतनी जल्दीबाजी की गयी कि किसी को यह विचारना भी जरूरी नहीं लगा कि चल रही तीर्थ यात्रा के भक्तों का क्या बनेगा।
अब वही बात स्वीकारने के बाद जब शान्ति हुई है तो क्या सरकार जवाब देगी कि उसने बिना वजह इतने जान-माल कि क्षति क्यों करवाई? हम इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा जारी रखेंगें.
मजे की बात यह है की जम्मू के लोगों से हुआ समझौता कोई नई बात को आधार बना के नहीं हुआ है। समझौते का मुद्दा तो पहले से ही तय था। बस सरकार ही उसे उलझा रही थी।
श्री अमरनाथ श्रायीं बोर्ड को जारी मौलिक आदेश में साफ़ तौर पर कहा गया था की उन्हें दी जानेवाली जमीन अस्थाई तौर पर इस्तेमाल के लिए है। यह तो उस दस्तावेज में भी कहीं नही था कि बोर्ड को कोई पक्का कब्जा दिया जा रहा है।
घाटी के मुसलमानों को बहकानेवालों ने इसे ग़लत तरीके से पेश किया। झूठी खबरें फैलाई गयीं मानो बोर्ड को कोई पक्का कब्जा दिया जा रहा हो। बोर्ड ने पक्के कब्जे कि कभी इच्छा भी नहीं जताई। मांग सिर्फ़ इतनी थी कि श्री अमरनाथ जी कि यात्रा के दौरान उस जमीन पर अस्थाई शिविर आदि लगाने दिया जाए ताकि यात्रियों को तकलीफों से बचाया जा सके।
अलगाववादियों ने तो सदा ही झूठ और फरेब का सहारा लिया है। मुसलमानों कि तुष्टिकरण कि अपनी परम्परा के कारणदिल्ली में बैठी सरकार घाटी में उठी एक आवाज पर हिल गयी और बोर्ड का करार रद्द कर दिया गया। इतनी जल्दीबाजी की गयी कि किसी को यह विचारना भी जरूरी नहीं लगा कि चल रही तीर्थ यात्रा के भक्तों का क्या बनेगा।
अब वही बात स्वीकारने के बाद जब शान्ति हुई है तो क्या सरकार जवाब देगी कि उसने बिना वजह इतने जान-माल कि क्षति क्यों करवाई? हम इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा जारी रखेंगें.
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